साधु मरा हैं, तो क्या अब लोकतंत्र की हत्या नहीं? क्यों मौन है सरकार? – दीपक सारस्वत 

इस गुरुवार 3 साधुओं की बड़ी बेरहमी से पीट पीट कर पालघर, महाराष्ट्र में एक भीड़ ने जान ले ली. कोई शोर ना मीडिया में उठा, ना किसी राजनेता ने मुँह खोला. सवाल है- आखिर क्यों राजनैतिक गलियारों में सन्नाटा है?

अब कोई बॉलीवुड स्टार अवार्ड वापस नहीं करेंगें, अब संविधान खतरे में नहीं पड़ा है, कोई राजनेता ट्वीट नहीं करेगा, कोई चैनल अब डिबेट नहीं करेगा – दीपक सारस्वत                            ( फेसबुक live)

फ़िल्म निर्देशक व प्रतिष्ठित समाजसेवी दीपक सारस्वत ने कल रात एक लाइव विडियो जारी किया, जिसमें सरकार व पुलिस पर उंगली उठाते हुए कई सवाल खड़े कर दिए, ये मामला आखिर सुर्खियों में क्यों नहीं आया, इतनी बड़ी निर्मम हत्या पर आखिर कोई राजनेता क्यों नहीं बोला?
सारस्वत ने बताया की जिन साधु महंत सुशील गिरी महाराज की हत्या हुई है, वो उनसे पिछले वर्ष अस्पताल में मिले थे, अस्पताल में दीपक सारस्वत ने उनका इलाज कराया था और उन्होंने दीर्घायु का आशीर्वाद भी दिया था. पर आज वही संत अमानवीय भीड़ के शिकार बन गये व ब्रह्मलीन हो गये.

सरकार अब कुछ सवालों के घेरे में आ गयी है-

– विडियो में साफ देखा जा सकता था, की पुलिस के सामने साधुओं को बेरहमी से पीटा गया था, क्या मज़बूरी थी पुलिस की कि उन्होंने हवाई फायर तक नहीं किया? 

– लॉकडॉन होने के बावजूद इतनी भीड़ एक जगह इकट्ठी कैसे हुई, जब पुलिस को भनक भी मिली, तो अतिरिक्त पुलिस क्यों नहीं बुलाई गयी? 

– अभी तक सिर्फ हमदर्दी व सांत्वना के बयान मुख्यमंत्री ने दिए हैं, आखिर सरकार आक्रोशित क्यों नहीं है, क्या कोई कठोरतम कार्यवाही के आदेश देगी सरकार?

आखिर कब सचेत होगी सरकार? सोशल मीडिया पर ये विडियो तेजी से फ़ैल रहा है. पूरा संत समाज व हिंदू समाज गुस्से में है, जूना अखाडा के संत नारायण गिरी जी ने तो ये तक कह दिया – की अगर महाराष्ट्र सरकार हत्या के मामले को गंभीरता से नहीं लेगी, तो संत समाज इस करोना के बाद भीषण आंदोलन कर सकता है.
अब देखना ये हैं, इस जघन्य अपराध के लिए सरकार किस तरह की कमेटी बनती है व पालघर में हुई हिंसा पर क्या कार्यवाही होती है?