हीरा निसर्गोपचार आश्रम “चले प्रकृति की ओर”

Ranjeet Kaur;April23,2020

प्राकृतिक चिकित्सा व योग साधना द्वारा दीर्घायु स्वस्थ एवं निरोग रहे।अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा परिषद् राजघाट द्वारा संचालित शैक्षणिक कार्यक्रम भी करवाती है जिसके अंतर्गत परिशिष्ट उपचार व डी एन वाई एस के कार्यक्रम आते हैं।

हीरा लाल मीणा 13 दिसंबर 1976 राजस्थान की छोटे से गांव इंदरपुर में पैदा हुए व पले बढ़े। उनके दादाजी वैद्य थे। वह अपने दादाजी के साथ उपचार मे मदद किया करते थे। बचपन से ही हीरालाल को सेवा करने का शौक था। इसी कारणवश वह समाज सेवक बनना चाहते थे।

2010 में वह राजस्थान से उत्तर प्रदेश आ गए और उन्होंने समाज सेवा आरंभ कर दी। यह गुण उन्हें विरासत में मिला। समाज सेवा  उनके खून में है। उनकी बीवी भी उन्हीं की तरह डी एन वाई एस है और उन्हें सपोर्ट करती हैं। डॉक्टर हीरालाल का कहना है ” गांधीजी उनके प्रेरणा स्रोत हैं।” हीरालाल हमेशा से ही समाज सेवक बनना चाहते थे। यह आश्रम उनका सपना है जो साकार हुआ है। आए मिलकर योग अपनाएं और जैसा कि हीरालाल कहते हैं चले प्रकृति की ओर।